Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, story

मेरा गाँव

“मेरा गाँव” शांति की ज़िंदगी में यूँ तो कोई दु:ख नहीं है, पर कहते है न, अकेलापन इंसान को खा …


“मेरा गाँव”

शांति की ज़िंदगी में यूँ तो कोई दु:ख नहीं है, पर कहते है न, अकेलापन इंसान को खा जाता है। भावनाओं को व्यक्त करने का ज़रिया हर किसीको चाहिए। फिर चाहे बच्चों के सामने ही सही, मन की अठखेलियाँ को संवाद वाचा देता है। इंसान किसी के साथ बात करके हल्का महसूस करता है।
ऐसा नहीं की बेटा और बहू शांति को ठीक से नहीं रखते, पर एक उम्र के बाद खासकर जब पति या पत्नी, दो से एक हो जाते है, तब दुनिया सूनी और वीरान हो जाती है। सारे सुखों बीच भी मन अवसाद से घिर जाता है। ऐसे ही पति के गुज़र जाने के बाद, अकेलेपन की शिकार शांति को याद आ गया वो गुज़रा वक्त। कहाँ वो घर की दहलीज़ पर बैठे पास पड़ोस की औरतें शाम होते ही सब्ज़ी चुनते, लहसुन छिलते और स्वेटर बुनते बातों ही बातों में एक दूसरे के संग अपने एहसास बाँट कर, दिल हल्का कर लिया करती थी। न इतनी शानों शौकत थी, न इतनी सुविधाएँ, फिर भी जीवन में सुख शांति और खुशियाँ थी, अपनापन था, परवाह थी। गाँव की साफ़ आबोहवा और शुद्ध खान-पान से तबियत भी ठीक रहती थी। शहर के प्रदूषित वातावरण ने उम्र के चलते कितनी बिमारियों का शिकार बना दिया था।
शांति के बेटे-बहू ने शहर में चार बैडरूम हाॅल किचन का फ़्लेट लिया, और माँ को बड़े प्यार से उनके स्पेशल कमरे में ऐशो आराम से रखना चाहा। घर में एक से बढ़कर एक सारी सुविधाएँ है, स्वीच दबाते ही हर काम हो जाता है, फिर भी मन को सुकून कहाँ। बेटा बहू नौकरी पर चले जाते है, आने के बाद मोबाइल में व्यस्त हो जाते है। बच्चें स्कूल, खेल कूद और विडियो गेम में मशरूफ़ है। कोई शिकायत नहीं पर सबकी अपनी-अपनी दुनिया है, सब व्यस्त है। मन की बात करें भी तो किसके साथ करें। शांति को ऐसा लगता मानों विशाल गगन में उड़ने वाली चिड़ीया को सोने के पिंजरे में कैद कर दिया हो। भरे-पूरे परिवार के बीच भी शांति को तन्हा महसूस होता है। ऐसा लग रहा है मानों अपने फाइव स्टार सुविधा वाले रूम में पिंजर सा महसूस करते ज़िंदगी कट रही है। शहरी वातावरण से उब चुकी शांति ने बेटे से कहा भाई मेरी गाँव जाने की टिकट करवा दे, मेरी सहेली कुसुम बहुत बीमार है खबर-अंतर पूछ आऊँ, और सारे रिश्तेदारों से भी मिल आऊँ। बेटा समझ गया कुसुम मौसी का कल तो फोन आया था भली चंगी तो है, पर शायद माँ अपना गाँव मिस कर रही है। बेटे ने माँ की भावनाओं का मान रखते तुरंत टिकट बुक करवा दी।
गाँव की मिट्टी को छूते ही शांति की आँखें नम हो गई। शांति को देख अड़ोस-पड़ोस की सारी महिलाएँ और बच्चें आ गए। कोई पानी लेकर आया, कोई चाय, तो कोई नास्ता शाम के खाने की दावत भी कमला ने दे दी। बेटियों ने मिलकर घर और आँगन की सफ़ाई कर दी। पड़ोस वाली दुर्गा ने शांति को चाय का कप थमाते कहा चाची ये लीजिए अपनी गाय ‘गौरी’ के ताजे दूध से बनाई है। चाय पीते ही शांति से मन ही मन तुलना हो गई। कहाँ पैकेट वाले मिलावटी दूध की चाय का स्वाद और कहाँ असली दूध की बनी चाय। शांति की आँखें नम हो गई। शहर में कहाँ मिलता है ऐसा अपनापन? सबके दरवाज़े बंद रहते है। पड़ोस में कौन रहता है ये भी एक दूसरे को मालूम नहीं होता। कोई किसीकी मुसीबत में ये सोचकर साथ नहीं देता की, कौन झमेले में पड़े। सुबह से शाम दौड़ते हुए इंसानों का मेला और वाहनों का शोर। प्रदूषित वातावरण से दम घुटने लगता है। आधुनिकीकरण ने इंसान से जीवन का असली मज़ा ही छीन लिया है। सब के सब ज़िंदगी जीते नहीं ढ़ोते हुए महसूस हो रहे है। आज पुराने घर की दहलीज़ पर बैठे सहेलियों से बतियाते शांति का मन हल्का हो गया और गली में खेलते बच्चों को देख शांति को सुकून मिला। तो दूसरी ओर आधुनिकरण और इलेक्ट्रानिक खिलौनों में खोते अपने पोते पोतियों के बचपन पर तरस आ गया।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

saerch tag : mera gaanv, story mera-gaanv, mera village, my village, my village story in hindi, hindi story, mera gaanv hindi kahani, mera gaanv kahani hindi

Related Posts

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

गुड्डू एक चंचल और होशियार लड़का था। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था और हमेशा स्कूल में सबसे आगे रहता

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और शांत गाँव था—देवगिरी इस गाँव के पास एक नीली-सी झील थी,

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

July 28, 2025

कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

July 24, 2025

कामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,

कहानी – ठहर गया बसन्त

कहानी – ठहर गया बसन्त

July 6, 2025

सरबतिया …. ओ ..बिटिया सरबतिया…….अपनी झोपड़ी के दरवाज़े  के बाहर ,बड़ी हवेली हवेली वाले  राजा ठाकुर के यहाँ काम करने

दीपक का उजाला

दीपक का उजाला

June 10, 2025

गाँव के किनारे एक छोटा-सा स्कूल था। इस स्कूल के शिक्षक, नाम था आचार्य देवदत्त, अपने समय के सबसे विद्वान

Next

Leave a Comment