Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, story

भीड़ या भीड़ का हिस्सा

 भीड़ या भीड़ का हिस्सा हम सब बीरबल की इस कहानी से सुपरिचित हैं ही। एक बार राजा अकबर अपने …


 भीड़ या भीड़ का हिस्सा

जयश्री बिरमी अहमदाबाद

हम सब बीरबल की इस कहानी से सुपरिचित हैं ही।

एक बार राजा अकबर अपने दरबार में किसी खास विषय पर चर्चा कर रहे थे। उस विषय पर उन्होंने राज दरबार में मौजूद सभी लोगों से उनकी राय मांगी। ऐसे में दरबार में उपस्थित सभी मंत्रीगणों ने अपनी-अपनी बुद्धि के हिसाब से जवाब दिया। राजा यह देखकर बहुत हैरान हुए कि सभी का जवाब एक दूसरे से बिल्कुल अलग था। वैसे सभी बुद्धिमान थे,इस पर राजा अकबर ने बीरबल से ऐसा होने के पीछे की वजह पूछी और सवाल किया, ‘आखिर सबकी सोच एक जैसी क्यों नहीं होती?’ उपस्थित सभी मंत्रीगणों ने अपनी-अपनी बुद्धि के हिसाब से जवाब दिया। उसी शाम राजा अकबर बीरबल के साथ अपने बाग में टहलने जाते हैं, तब वो दोबारा वही सवाल दोहराते हैं। ‘बीरबल मैंने तुमसे पूछा था कि सबकी सोच एक जैसी क्यों नहीं होती? इस सवाल का जवाब दो मुझे।’ इसी के साथ एक बार फिर अकबर और बीरबल के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ जाती है। जब लाख कोशिशों के बावजूद राजा अकबर को बीरबल की बात नहीं समझ आती, तो वह अपनी बात को समझाने के लिए एक युक्ति निकालता है।जैसे हमेशा से होता आया था।

         बीरबल कहता है, ‘महाराज मैं आपको साबित कर दूंगा कि कुछ मामलों में सबकी सोच एक जैसी ही होती है। बस आप एक फरमान जारी कर दीजिए। फरमान यह होगा कि आने वाली अमावस्या की रात को सभी अपने-अपने घर से एक लोटा दूध ले कर उसे जो नया तालाब खोदा गया हैं उसमें डालेंगे और इस फरमान को न मानने वाले को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।’

         वैसे तो राजा अकबर को बीरबल की यह बात मूर्खता वाली लगती है, लेकिन वह बीरबल के कहे अनुसार शाही फरमान जारी करवा देते हैं। राजा के इस फरमान को सुनते ही सभी में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी कि तालाब में दूध डालना एक मूर्खता पूर्ण कार्य है। फिर भी राजा का फरमान था, तो मानना सभी को था। सभी अमावस्या की रात का इंतजार करने लगे।

               देखते-देखते अमावस्या की रात भी आ गई और सभी अपने-अपने घर से एक-एक भरा लोटा लेकर तालाब के पास जमा हो जाते हैं। बारी-बारी सभी तालाब में लोटा पलट कर अपने-अपने घर की ओर चले जाते हैं।सुबह राजा अकबर और बीरबल दोनों वहां पहुंचे तो देखते हैं कि तालाब में दूध का एक भी लोटा डाला हो ऐसा नहीं लगता था,स्वच्छ निर्मल जल से तालाब भरा हुआ था।

  राजा अकबर बीरबल से कहते हैं, ‘मैंने तो तालाब में दूध डालने का फरमान जारी किया था। फिर ये दूध की जगह पानी से क्यों भरा गया?’ राजा के इस सवाल पर बीरबल मुस्कुराते हुए कहता है, ‘महाराज तालाब में वह दूध डालता है या पानी किसको पता नहीं चलेगा,इतने दूध में मेरा एक लोटा पानी भी दूध सा ही लगेगा।ये एक व्यक्ति ने नहीं सभी ने सोचा और ये तालाब पानी से भर गया हैं।यहां और सभी की सोच एक सी लगी न आपको?”

      इस कहानी से पता लगता हैं कि भीड़ की मानसिकता ही ऐसी हैं।अगर एक एक करके दिन के समय दूध डालना होता तो कहानी ही अलग होती लेकिन यहां सब को विश्वास था कि उसके पानी का किसी को पता नहीं लगेगा।

   जब आदमी अकेला खड़ा होता हैं तो शिष्टाचार युक्त वर्तन करता हैं लेकिन जब कुछ लोगों के साथ या भीड़ में होता हैं तो उसका वर्तन अलग होता हैं।अपने आप को संभ्रांत कहने वाले भी किसी भीड़ में पकड़े गए चोर या मवाली को थप्पड़ जड़ने से परहेज नहीं करेगा।वैसे ही उकसाई हुई भीड़ में होता हैं,किसीको क्या पता चलेगा की मैने भी पत्थर उछाला हैं दंगे में।जिसे हम मॉब मेंटालिटी भी कहने हैं।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

गुड्डू एक चंचल और होशियार लड़का था। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था और हमेशा स्कूल में सबसे आगे रहता

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और शांत गाँव था—देवगिरी इस गाँव के पास एक नीली-सी झील थी,

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

July 28, 2025

कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

July 24, 2025

कामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,

कहानी – ठहर गया बसन्त

कहानी – ठहर गया बसन्त

July 6, 2025

सरबतिया …. ओ ..बिटिया सरबतिया…….अपनी झोपड़ी के दरवाज़े  के बाहर ,बड़ी हवेली हवेली वाले  राजा ठाकुर के यहाँ काम करने

दीपक का उजाला

दीपक का उजाला

June 10, 2025

गाँव के किनारे एक छोटा-सा स्कूल था। इस स्कूल के शिक्षक, नाम था आचार्य देवदत्त, अपने समय के सबसे विद्वान

Next

Leave a Comment